मैं देखता हूँ
वे कर रहे हैं कुछ,
पर वे कहते हैं – मैं कुछ नहीं कर रहा।
मुझे होता है आश्चर्य,
तब वे उठाते हैं रहस्य से पर्दा,
बताते हैं मुझे –
कोई दूसरा करवाता है यह सब वे नहीं करते इसे स्वयं
सच कहते हैं वे
दिखते हैं वो
पर करता कोई दूसरा है
वे तो स्क्रीन हैं
कंप्यूटर कोई दूसरा है
एक स्वयंत्रित कंप्यूटर।
कभी वो ज्ञात है
कभी अज्ञात है
कौन है कराने वाला
स्वयं वे नहीं जानते
वही जो करा रहा है सब!
आश्चर्य! कार्य तो वही करते हैं!!












